वैश्विक परिदृश्य

पूरा विश्व के देश आपस मे प्रतिस्पर्धा कर रहे है कि मैं सबसे अच्छा हूँ, मेरे बराबर का देश इस धरती के पटल पर कोई नहीं है।
परन्तु हमारा भारत जिसने इस धरातल पर मानव को जीना सिखाया, उसे तन ढकना सिखाया, उसे बोलना ओर मानव का रूप दिया। उस देश को पूरा विश्व आज कह रहा है कि आप सबसे ज्यादा पर्यावरण प्रदूषण कर रहे हो।
ऐ दुनियावालों यह भारतवर्ष ऐसा नहीं था और ना ही ऐसा कभी होगा, परन्तु इस देश पर कितने जनो ने राज किया है वो आप भूल जाते है, जब किसी देश का नेतृत्व ही दूसरे के हाथ मे हो वो भी हजारों साल तक फिर आप बात करते हो ऐसी। तुम्हे शर्म क्यों नहीं आई जब इस सोने सी चिड़िया देश के लोगो पर अंग्रेज जुर्म ढा रहे थे, अपनी संस्कृति को जबरन यहां के गरीब और बेसहारा लोगो पर थोप रहे थे। आज सबको भारत ही दिख रहा है क्या अमेरिका, ब्रिटेन आदि देश जहां के लोगो ओर सरकारों ने पूरे विश्व पर जो यातनाये ढाई है उस पर कोई क्यों नहीं बोलता, क्योंकि वो सब के गुरु घंटाल है,उनके बारे में बोलकर अपने को मरना थोड़े ही है। कब किसको टपका ले पता थोड़े ही चलता है जैसे ओसामा को टपकाया।

एक छोटी सी कोशिश

जीवन दान

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